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इस नये साल से क्या सीखे.. जाने क्या रही भुली बिसरी यादे

नये साल का स्वागत- सुस्वागत 2019 पूरी दुनिया 2020 का स्वागत कर रही है। कल सारी रात जश्न मनाया गया । कठाके की सर्दी ने भी नए साल के –जोश...


नये साल का स्वागत-
सुस्वागत 2019 पूरी दुनिया 2020 का स्वागत कर रही है। कल सारी रात जश्न मनाया गया । कठाके की सर्दी ने भी नए साल के –जोश को ठंडा  नही होने दिया । आज पूरे दिन बधाईयों का सिलसिला चलेगा। नए साल 2020 में सभी के लिए देश भर के लिए पूरे विश्व के लिए शुभ की कामना की जानी चाहिए बीते साल की कड़वी बाते भुला दी जानी चाहिए। नेताओं के मूर्खतापूर्ण वक्त्व्य भुला दिए जाने चाहिये।
और उऩके नाम ओर चेहरे याद रक्खे जाने चाहिये। क्योकि नालायक नेता पावर में नही आने चाहिये। एक्सीडेंटल कोई भी नेता किसी कुर्सी की गरिमा को चोट न पहुंचा दे, इस साल में यही कामना की जानी चाहिये।

नया साल को इन देशो ने मनाया अपने- अपने समय पर-
भारतीय समय के अनुसार 31 दिसम्बर को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर टोंगा समोआ नाम के देश ने 2020  का स्वागत किया। इस देश में नया साल सबसे पहले दस्तक देता है। उसके बाद न्यूजीलैंड मं नए साल ने दस्तक दी। न्यूजीलैंड में नया साल भारतीय समय के अनुसार 31 दिसम्बर को 4 बजकर 30 मिनट पर मना लिया गया। बंगलादेश में रात 11 बजकर 30 मिनट पर ओऱ पाकिस्तान में 12 बजकर 30 मिनट पर तथा भारत व श्रीलका में 12 बजे नये साल का स्वागत पूरे जोश से किया गया।



नये साल पर क्या क्या रहेगी हमें उम्मीदे-
2020 में कामना की जानी चिहिए कि पाकिस्तान की तरफ से भारत के लिए अहमकाना  बयानबाजीं ओर हरकते कम से कम हो, वहा पल रहे शैतानों के दिलोदिमाग पर भारतीय सेना का खौफ हो। भारतीय राजनीति में देशहित के लिए निरंतर चिन्तन चलता रहे। घटिय़ा राजनिति करने वाले धीरे- धीरे राजनीति से दूर होते रहें यही कामना होनी चाहिए। राजनीति में परिवार वाद खूब फलफूल रहा है, यह अच्छा नहीं है। राजनीति में सेवा के नाम पर स्वार्थ का चलन पहले से अधिक बढा है।

नये साल पर इनसे ले सबक-
यह टीवी सीरियलों ओर सिनेमा का हमारे समाज पर अधिक प्रभाव पड़ रहा है। हर तरह की बेशर्मा को सीरियलों में भी ओर फिल्मों में बड़े गर्व के साथ पेश किया जाता है। ऐसा इस साल कुछ कम हो एसा सोचा जाना चाहिए। महिलाओ के सिगरेट पीने के दृश्य , मदिरा पान के दृश्य इस साल की फिल्मों में न हो तो अच्छा है। देश के संसाधनों पर छपट्टा मार कर खुद को समझदार समझने की गलत सोच भी बढ़ती जा रही है, इसकी जगह मुल्क की खिंदमत की सोच में बढ़ोतरी हो ते ज्यादा अच्छा है।

नये साल से बोले तौल- मौल कर-
2020 में सरकार के विरुद्ध असहमति वाले परिपक्व शब्दों का स्वागत सरकार की तरफ से भी होना चाहिये। इसके साथ ही अपरिपक्व शब्दों का भेद भी साफं होता रहना चाहिये । अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बोलने की अनुमति देती है। यह हर समय ध्यान में रखा जाना चाहिये। कि बोलना, बोलना ही रहे, उसे किसी भी हालत में किसी पशु के बोलने से न तोला जाए। अब बोलने की आजादी का गलत इस्तेमाल हो रहा है।

नये साल से पहले  ट्वीट के माध्यम से तीखी प्रकिया-
फिल्म निर्माता निर्देशक अनुराग कश्यप ने केद्रं सरकार ओर प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी पर ट्वीट करके निशाना साधा। बेहद तीखी भाषा में किये गए एक ट्वीट में उन्होने लिखा, हमारा प्रधान सेवक , हमारा प्रधानमंत्री , जनता का परधान नौकर बहरा है, गूँगा और भावनाओंके परे है। वो सिर्फ एक नौटंकी है। जो भाषण दे सकता है, बाकी कुछ उसके बस का नही है। उसको न दिखाई दे रहा है। न सुनाई दे रहा है।वो अभी नए-नए झूठ सीखने में व्यस्त है। इससे पहले उऩ्होंने आरोप लगाया कि सरकार समर्थित असामाजिक तत्व दंगा शुरु करते है और फिर जनता पर पुलिस टूट पड़ती है।

नये साल से पहले के तीखी बयानाबाजी-
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने आरोप लगाया कि इस सारी स्थिति के पीछे बीजेपी सरकार का हाथ है।
नागरिकता संशोधन बिल कानून को लेकर फिल्म उद्योग से जुड़े कलाकारो को लेकर सोशल मिडिया में काफी कुछ कहा जा रहा है। कुछ कलाकार खुलकर इस कानून का विरोध कर रहे है, तो कुछ कलाकारों ने समर्थन भी किया है। वही कुछ कलाकारों की चुप्पी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

नये साल से पहले इन्होने किया सरकार के फैसले का विरोध-
अनुराग कश्यप ने क अन्य ट्वीट करके कहा था कि देश एक बार फिर आपातकाल देख रहा है। उन्होंने यह बात उत्तरप्रदेश के डीपी के उस ट्वीट के साथ शेयर करते हुए कही थी जिसमं कहा गया था कि प्रदर्शनो पर रोक लगा दी गई है। जिमिया हिंसा के बाद भी अनुराग कश्यप, मनोज वाजपेयी, परिणिती चौपड़ा,विक्की कौषल, ऋचा चड्ढा, दिया मिर्जा, विशाल भारद्वाज, फरहान अख्तर,ऋतिक रोशन जैसे कलाकारों ने खुलकर पुलिस ओर सरकार की आलोचना करते हुए ट्वीट किए थे।

नये साल से पहले इन्होने किया सरकार के फैसले का समर्थन-
वही विवेक अग्निहोत्री, परेश रावल, अशोक पंडित, पायल रोहतगी जैसे कलाकार लगातार विरोध पर सवाल उठा रहे है। विवेक अग्निहोत्री ने एक खबर को ट्वीट करते हुए लिखा है कि “गलत सुचना फैलाना , उकसाना ओर हिसां भड़काना (खासकर अशिक्षित अल्पसंख्यको को ) न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि अनैतिक अपराध है। अगर लोकतन्त्र धर्म है तो ये पाप है। संविधान अगर केवल किताब है , तो ये ईशनिदां है”।

समझदारी वाले ट्वीट-
1.       1. वही परेश रावल ने नागरिकता कानून पर एक ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा, “कृप्या पढे ओर उन लोगो को समझाये , जो बेतुकी हिसां पर उतारू है”।

2.      2. वही फिल्मकार अशोक पंडित ने विरोध प्रदर्शन पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया, “इन तथाकथित विरोध प्रदर्शनों से ये पता चलता है कि हमारे इस महान देश में राहुल गांधी जैसे बहुतेरे रहते है”। किसी भी बात से असहमति अलग बात है, मगर असहमति के शब्द अपरिपक्क नहीं होने चाहिये।

बीते साल में बहुत कुछ गलत कहा गया ट्वीट किया गया, फिर गलत पर गलत टिप्पणियों का सिलसिला भी चलता रहा। ऐसा इस न हो।

किसी शायर ने कहा है-
मेहनतों में रंग हो ओर हिम्मतों में धार हो,
मन सदा संतुष्ट हो आन्नद का आधार हो।
जिन्दंगी चारों तरफ से तुमको खुशिय़ा बाटं दे,
साल का हर दिन तुम्हारे वास्ते त्यौहार हो।।

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