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जीत आपकी – सोच आपकी .. जानिये आप क्या क्या कर सकते है।

जीत आपकी – सोच आपकी 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏           एक बार एक विज्ञान की अनुसंधान प्रयोगशाला में एक प्रयोग किया गया। एक बड़े शीशे के टैंक ...

जीत आपकी – सोच आपकी
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
          एक बार एक विज्ञान की अनुसंधान प्रयोगशाला में एक प्रयोग किया गया। एक बड़े शीशे के टैंक में बहुत सारी छोटी छोटी मछलियाँ छोड़ी गयीं और फिर ढक्कन बंद कर दिया। अब थोड़ी देर बाद एक बड़ी शार्क मछली को भी टैंक में छोड़ा गया लेकिन शार्क और छोटी मछलियों के बीच में एक काँच की दीवार बनायीं गयी ताकि वो एक दूसरे से दूर रहें। शार्क मछली की एक खासियत होती है कि वो छोटी छोटी मछलियों को खा जाती है। अब जैसे ही शार्क को छोटी मछलियाँ दिखाई दीं वो झपट कर उनकी ओर बढ़ी।
        जैसे ही शार्क मछलियों की ओर गयी वो कांच की दीवार से टकरा गयी और मछलियों तक नहीं पहुँच पायी। शार्क को कुछ समझ नहीं आया वो फिर से छोटी मछलियों की ओर दौड़ी लेकिन इस बार भी वो विफल रही। शार्क को बहुत गुस्सा आया अबकी बार वो पूरी ताकत से छोटी मछलियों पे झपटी लेकिन फिर से कांच की दीवार बाधा बन गयी।
           कुछ घंटों तक यही क्रम चलता रहा, शार्क बार बार मछलियों पर हमला करती और हर बार विफल हो जाती। कुछ देर बाद शार्क को लगा कि वह मछलियों को नहीं खा सकती, यही सोचकर शार्क ने हमला करना बंद कर दिया वो थक कर आराम से पानी में तैरने लगी। अब कुछ देर बाद वैज्ञानिक ने उस कांच की दीवार को शार्क और मछलियों के बीच से हटा दिया उन्हें उम्मीद थी कि शार्क अब सारी मछलियों को खा जाएगी।
        लेकिन ये क्या, शार्क ने हमला नहीं किया ऐसा लगा जैसे उसने मान लिया हो कि अब वो छोटी मछलियों को नहीं खा पायेगी। काफी देर गुजरने के बाद भी शार्क खुले टैंक में भी मछलियों पर हमला नहीं कर रही थी।
         इसे कहते हैं – सोच। कहीं आप की सोच भी शार्क जैसी तो नहीं? हाँ! हममें से काफी लोग उस शार्क की तरह ही हैं जो किसी कांच जैसी दीवार की वजह से ये मान बैठे हैं कि हम कुछ नहीं कर सकते। और हममें से काफी लोग तो ऐसे जरूर होंगे जो शार्क की तरह कोशिश करना भी छोड़ चुके होंगे। लेकिन सोचिये जब टैंक से दिवार हटा दी गयी फिर भी शार्क ने हमला नहीं किया केवल इसलिए कि वो हार मान चुकी थी, कहीं आपने भी तो हार नहीं मान ली? कोई परेशानी या अवरोध हमेशा नहीं रहता , क्या पता आपकी काँच की दीवार भी हट चुकी हो लेकिन आप अपनी सोच की वजह से प्रयास ही नहीं कर रहे हैं।
            साधना के क्षेत्र में भी ऐसा ही होता है। एक दो बार की असफलताओं के बाद हम हार मान लेते हैं और प्रयास करना ही छोड़ देते हैं। प्रयास करना जारी रखिए, एक न एक दिन सफलता मिलनी ही है।


*मैंने .. हर रोज .. जमाने को ..*
*रंग बदलते देखा है ....*!!!




*उम्र के साथ .. जिंदगी को ..*
*ढंग बदलते देखा है .. !!!*

*वो .. जो चलते थे .. तो*
*शेर के चलने का.. होता था गुमान..*!!!
*उनको भी .. पाँव उठाने के लिए .. सहारे को तरसते देखा है !!!*
Success quotes


*जिनकी .. नजरों की .. चमक देख .. सहम जाते थे लोग ..*!!!
*उन्ही .. नजरों को .. बरसात .. की तरह ~~ बरसते देखा है .. !!!*

*जिनके .. हाथों के .. जरा से .. इशारे से ..पत्थर भी कांप उठते थे..*!!!
*उन्ही .. हाथों को .. पत्तों की तरह .. थर थर काँपते देखा है .. !!!*
Quotes for fun success quotes


*जिन आवाज़ो से कभी .. बिजली के कड़कने का .. होता था भरम ..*!!!
*उन.. होठों पर भी .. मजबूर .. चुप्पियों का ताला .. लगा देखा है .. !!!*

*ये जवानी .. ये ताकत .. ये दौलत ~~ सब कुदरत की .. इनायत है ..*!!!
*इनके .. जाते ही  .. इंसान को ~~ बेजान हुआ देखा है ... !!!*


*अपने .. आज पर .. इतना ना .. इतराना ~~ मेरे .. यारों ..*!!!
*वक्त की धारा में .. अच्छे अच्छों को ~~ मजबूर होता देखा है .. !!!*


*कर सको..तो किसी को खुश करो...दुःख देते ...हुए....तो*

*हजारों को देखा है ।।।*


  • *कभी इनका हुआ हूँ मैं,*

*कभी उनका हुआ हूँ मैं,*

*खुद के लिए कोशिश नहीं की,*
*मगर सबका हुआ हूँ मैं,*

*मेरी हस्ती बहुत छोटी, मेरा रूतबा नही कुछ भी*
   *हे प्रभु एसी सामर्थ दे कि*
 *डूबते के लिए सदा तिनका बना रहूं  मै*


*एक तौलिया से पूरा घर नहाता था।*
*दूध का नम्बर बारी-बारी आता था।*
*छोटा माँ के पास सो कर इठलाता था।*
*पिताजी से मार का डर सबको सताता था।*
*बुआ के आने से माहौल शान्त हो जाता था।*
*पूड़ी खीर से पूरा घर रविवार व् त्यौहार मनाता था।*
*बड़े भाई के कपड़े छोटे होने का इन्तजार रहता था।*
*स्कूल मे बड़े भाई की ताकत से छोटा रौब जमाता था।*
*बहन-भाई के प्यार का सबसे बड़ा नाता था।*
*धन का महत्व कभी कोई सोच भी न पाता था।*
*बड़े का बस्ता किताबें साईकिल कपड़े खिलोने पेन्सिल स्लेट स्टाईल चप्पल सब से छोटे का नाता था।*
*मामा-मामी नाना-नानी पर हक जताता था।*
*एक छोटी सी सन्दुक को अपनी जान से ज्यादा प्यारी तिजोरी बताता था।*
                       
                   *~~ अब ~~*


*तौलिया अलग हुआ, दूध अधिक हुआ,*
*माँ तरसने लगी, पिता जी डरने लगे,*
*बुआ से कट गये, खीर की जगह पिज्जा बर्गर मोमो आ गये,*
*कपड़े भी व्यक्तिगत हो गये, भाईयो से दूर हो गये,*

*बहन से प्रेम कम हो गया,*
*धन प्रमुख हो गया,अब सब नया चाहिये,*
*नाना आदि औपचारिक हो गये।*
*बटुऐ में नोट हो गये।*
*कई भाषायें तो सीखे मगर संस्कार भूल गये।*
*बहुत पाया मगर काफी कुछ खो गये।*
*रिश्तो के अर्थ बदल गये,*
*हम जीते तो लगते है*
*पर संवेदनहीन हो गये।*

*कृपया सोचें ,*
*कहां थे, कहां पहुँच गये।
  

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